प्रश्न 1: वर्तमान समय में भारत के वरिष्ठ नागरिकों के सामने स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी सबसे बड़ी चुनौतियाँ क्या हैं?
आज भी भारत में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक बीमारी आने पर अपनी बचत या बच्चों पर निर्भर रहते हैं। नीति आयोग की वर्ष 2024 की वरिष्ठ नागरिक देखभाल सुधार रिपोर्ट के अनुसार, केवल लगभग 18 प्रतिशत वरिष्ठ नागरिकों के पास स्वास्थ्य बीमा है। इसका अर्थ है कि अधिकांश बुजुर्ग गंभीर चिकित्सा खर्चों के प्रति पूरी तरह असुरक्षित हैं।
यहाँ तक कि जिनके पास स्वास्थ्य बीमा है, वे भी अक्सर यह महसूस करते हैं कि सह-भुगतान (को-पेमेंट), उप-सीमाएँ (सब-लिमिट) और पूर्व-विद्यमान बीमारियों के लिए प्रतीक्षा अवधि जैसी शर्तें उनके बीमा को अपेक्षा से कम उपयोगी बना देती हैं। उम्र बढ़ने के साथ एक साथ कई बीमारियाँ, नियमित चिकित्सकीय परामर्श और लगातार दवाओं की आवश्यकता होती है। इन्हीं जोखिमों और वहनीयता को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ नागरिकों के लिए बीमा उत्पादों में कुछ प्रतिबंधात्मक प्रावधान शामिल किए जाते हैं।
प्रश्न 2: पिछले कुछ वर्षों में वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा बाजार में क्या परिवर्तन आए हैं?
लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा किए गए सुधारों ने बाजार को अधिक व्यवस्थित बनाया है। प्रवेश आयु से जुड़े प्रतिबंधों में ढील दी गई है और आजीवन नवीकरण की सुविधा सुनिश्चित की गई है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों के लिए विकल्प बढ़े हैं।
इसके अलावा वर्ष 2024 में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) का विस्तार करते हुए 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को आय की परवाह किए बिना 5 लाख रुपये तक का वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान किया गया। यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
सबसे उत्साहजनक परिवर्तन मानसिकता में आया है। अब परिवार पहले की तुलना में कहीं अधिक जल्दी वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य सुरक्षा की योजना बनाने लगे हैं और यह सामाजिक बदलाव किसी भी नियामकीय सुधार जितना ही महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 3: सेवानिवृत्ति के बाद स्वास्थ्य बीमा खरीदते समय उपभोक्ताओं को किन बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए?
60 वर्ष की आयु में जो स्वास्थ्य आवश्यकताएँ होती हैं, वे 70 वर्ष की आयु में काफी अलग हो सकती हैं। इसलिए सबसे पहले बीमा राशि (सम इंश्योर्ड) का मूल्यांकन करें और सुनिश्चित करें कि वह वर्तमान और भविष्य की चिकित्सा लागतों को देखते हुए पर्याप्त हो।
इसके बाद को-पेमेंट, प्रतीक्षा अवधि और पूर्व-विद्यमान बीमारियों से जुड़ी शर्तों को ध्यान से समझें, क्योंकि यही कारक दावे के वास्तविक अनुभव को प्रभावित करते हैं।
उपभोक्ताओं को यह भी देखना चाहिए कि उनके निकट कौन-कौन से अस्पताल नेटवर्क में शामिल हैं, दावा प्रक्रिया कितनी सरल है और पॉलिसी में कौन-कौन से बहिष्करण (एक्सक्लूजन) मौजूद हैं। खरीद के समय जिन बिंदुओं पर कम ध्यान दिया जाता है, वही बाद में सबसे अधिक महत्वपूर्ण साबित होते हैं।
