
भरोसे का नया पैमाना : ईएसजी रेटिंग्स

आज का उपभोक्ता केवल यह नहीं देखता कि कोई उत्पाद कितना अच्छा है या कोई सेवा कितनी सस्ती है। वह यह भी जानना चाहता है कि जिस कंपनी पर वह भरोसा कर रहा है, क्या वह पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार है? क्या वह अपने कर्मचारियों, ग्राहकों और समाज के साथ निष्पक्ष व्यवहार करती है? क्या उसके निर्णय पारदर्शी, नैतिक और सुशासन के सिद्धांतों पर आधारित हैं? इन्हीं प्रश्नों का उत्तर देने में ईएसजी (Environmental, Social & Governance) रेटिंग्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
विश्वभर में निवेशकों, नियामकों और उपभोक्ताओं के बीच ईएसजी का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। भारत में भी जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण अब केवल कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह व्यवसाय की विश्वसनीयता, दीर्घकालिक विकास और उपभोक्ता विश्वास का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।
इन्हीं महत्वपूर्ण विषयों पर केयर ईएसजी (CARE ESG) के बिजनेस हेड – कॉर्पोरेट एंड इंफ्रा एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री सैकत रॉय से उपभोक्ता पंचायत ने विशेष बातचीत की। इस विस्तृत साक्षात्कार में उन्होंने सरल और व्यावहारिक भाषा में बताया है कि ईएसजी रेटिंग्स क्या हैं, वे आम उपभोक्ताओं और खुदरा निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं, कॉर्पोरेट गवर्नेंस किस प्रकार उपभोक्ता अनुभव और विश्वास को प्रभावित करता है, तथा भविष्य में भारत में जिम्मेदार व्यवसाय की दिशा क्या होगी।
यह संवाद केवल निवेशकों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जागरूक उपभोक्ता, नीति-निर्माता, उद्योग जगत और नागरिक समाज के लिए उपयोगी है, क्योंकि आज के दौर में विश्वास ही किसी कंपनी की सबसे बड़ी पूंजी है, और ईएसजी रेटिंग्स उसी विश्वास का विश्वसनीय पैमाना बनकर उभर रही हैं।
प्रश्न 1. एक सामान्य उपभोक्ता ईएसजी (ESG) रेटिंग्स को कैसे समझे? क्या ईएसजी रेटिंग्स केवल संस्थागत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हैं, या आम उपभोक्ताओं और खुदरा निवेशकों के लिए भी इनका महत्व है?
सैकत रॉय:
एक सामान्य उपभोक्ता ईएसजी (Environmental, Social and Governance) रेटिंग्स को किसी कंपनी की "जिम्मेदार व्यवसाय रिपोर्ट कार्ड" के रूप में समझ सकता है। जिस प्रकार किसी छात्र की प्रगति का मूल्यांकन रिपोर्ट कार्ड से किया जाता है, उसी प्रकार ईएसजी रेटिंग यह बताती है कि कोई कंपनी पर्यावरण, समाज और सुशासन से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों का कितना जिम्मेदारीपूर्वक पालन कर रही है।
पारंपरिक वित्तीय रेटिंग जहाँ मुख्य रूप से किसी कंपनी की आर्थिक स्थिति या वित्तीय क्षमता का आकलन करती है, वहीं ईएसजी रेटिंग यह देखती है कि कंपनी पर्यावरणीय जोखिमों का प्रबंधन कैसे कर रही है, कर्मचारियों, ग्राहकों और अन्य हितधारकों के साथ कितना निष्पक्ष व्यवहार करती है तथा उसके सुशासन (Governance) के मानक कितने मजबूत हैं।
केयर ईएसजी (CARE ESG) की मूल्यांकन पद्धति के अंतर्गत कंपनियों को 0 से 100 अंकों के पैमाने पर आंका जाता है। उनके प्रदर्शन के आधार पर उन्हें लीडरशिप (Leadership), स्ट्रॉन्ग (Strong), एडिक्वेट (Adequate), बिलो एवरेज (Below Average) और वीक (Weak) जैसी श्रेणियों में रखा जाता है।
यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि ईएसजी मूल्यांकन उद्योग-विशिष्ट (Sector-Specific) होता है। प्रत्येक उद्योग की चुनौतियाँ और जिम्मेदारियाँ अलग होती हैं, इसलिए सभी कंपनियों का मूल्यांकन एक ही मानक पर नहीं किया जाता।
उदाहरण के लिए—
यह उद्योग-विशिष्ट दृष्टिकोण उपभोक्ताओं और निवेशकों को किसी कंपनी के वास्तविक ईएसजी प्रदर्शन को बेहतर ढंग से समझने में सहायता करता है।
आज ईएसजी रेटिंग्स केवल बड़े संस्थागत निवेशकों तक सीमित नहीं हैं। इनका महत्व आम उपभोक्ताओं और खुदरा निवेशकों के लिए भी लगातार बढ़ रहा है। इनके माध्यम से—
हालाँकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ईएसजी रेटिंग और क्रेडिट रेटिंग एक-दूसरे से भिन्न हैं।
क्रेडिट रेटिंग यह बताती है कि कोई कंपनी अपने ऋण का भुगतान करने में कितनी सक्षम है, जबकि ईएसजी रेटिंग यह मूल्यांकन करती है कि कंपनी पर्यावरण, सामाजिक उत्तरदायित्व और सुशासन से जुड़े जोखिमों एवं अवसरों का प्रबंधन कितनी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ कर रही है।
प्रश्न 2. कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) और उपभोक्ता अनुभव के बीच क्या संबंध है? क्या मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस से ग्राहक सेवा, शिकायत निवारण, पारदर्शिता और उपभोक्ता विश्वास पर सीधा प्रभाव पड़ता है?
सैकत रॉय:
कॉर्पोरेट गवर्नेंस का उपभोक्ता अनुभव से सीधा संबंध है, क्योंकि यही तय करता है कि कोई कंपनी कितनी जवाबदेह, पारदर्शी और उत्तरदायी है।
अक्सर लोग कॉर्पोरेट गवर्नेंस को केवल निदेशक मंडल (Board of Directors) या कानूनी अनुपालन तक सीमित समझते हैं, जबकि वास्तव में इसका दायरा इससे कहीं अधिक व्यापक है। इसमें व्यावसायिक नैतिकता (Business Ethics), हितधारकों के साथ संवाद, शिकायत निवारण व्यवस्था, जोखिम प्रबंधन, रिपोर्टिंग की गुणवत्ता तथा ईएसजी (ESG) से जुड़े विषयों की निगरानी भी शामिल होती है।
केयर ईएसजी (CARE ESG) की मूल्यांकन पद्धति में कॉर्पोरेट गवर्नेंस का आकलन कई महत्वपूर्ण पहलुओं के आधार पर किया जाता है, जैसे—
उपभोक्ता के दृष्टिकोण से देखें तो अच्छी कॉर्पोरेट गवर्नेंस का प्रभाव सीधे उनके दैनिक अनुभव में दिखाई देता है। उदाहरण के लिए—
इन्हीं पहलुओं का मूल्यांकन केयर ईएसजी विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों के सामाजिक (Social) और गवर्नेंस (Governance) प्रदर्शन के अंतर्गत करता है।
जिन कंपनियों की गवर्नेंस व्यवस्था मजबूत होती है, वे उपभोक्ताओं का विश्वास अधिक आसानी से अर्जित करती हैं, क्योंकि उनमें स्पष्ट जवाबदेही, मजबूत आंतरिक नियंत्रण, बेहतर प्रकटीकरण व्यवस्था तथा हितधारकों के साथ प्रभावी संवाद की संस्कृति विकसित होती है।
प्रश्न 3. किसी कंपनी की दीर्घकालिक विश्वसनीयता के लिए कौन-से ईएसजी (ESG) कारक सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं? आपके अनुभव में ऐसे कौन-से मानदंड हैं जो किसी कंपनी की प्रतिष्ठा और हितधारकों के विश्वास को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं?
सैकत रॉय:
किसी भी कंपनी के लिए सबसे महत्वपूर्ण ईएसजी कारक उसके व्यवसाय के क्षेत्र (Sector) पर निर्भर करते हैं। इसलिए किसी भी विश्वसनीय ईएसजी मूल्यांकन में 'मैटेरियलिटी' (Materiality) अर्थात् उस उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषयों की पहचान अत्यंत आवश्यक होती है।
केयर ईएसजी (CARE ESG) की मूल्यांकन पद्धति में पर्यावरण (Environmental), सामाजिक (Social) और गवर्नेंस (Governance) से जुड़े लगभग 400 प्रमुख संकेतकों (Key Indicators) का मूल्यांकन किया जाता है, जिन्हें 24 विभिन्न विषयों (Themes) में विभाजित किया गया है। प्रत्येक संकेतक को संबंधित उद्योग की प्रकृति और उसकी प्रासंगिकता के अनुसार अलग-अलग महत्व (Weightage) दिया जाता है।
हालाँकि विभिन्न क्षेत्रों की प्राथमिकताएँ अलग हो सकती हैं, फिर भी कुछ ऐसे ईएसजी मानदंड हैं जो लगभग सभी उद्योगों में किसी कंपनी की दीर्घकालिक विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा को प्रभावित करते हैं। इनमें प्रमुख हैं—
महत्वपूर्ण बात यह है कि ईएसजी मूल्यांकन केवल बड़ी-बड़ी घोषणाओं या नीतियों के आधार पर नहीं किया जाता। इसमें कंपनी की वास्तविक कार्यप्रणाली, निर्धारित लक्ष्य, प्रदर्शन संकेतक (Performance Indicators), संक्रमण (Transition) की रणनीति, प्रकटीकरण की गुणवत्ता, स्वतंत्र सत्यापन (Assurance) तथा सुधार की दिशा का भी मूल्यांकन किया जाता है।
केयर ईएसजी अपनी मूल्यांकन पद्धति में 'ट्रांज़िशन स्कोरिंग' (Transition Scoring) को भी शामिल करता है, जिसके माध्यम से पिछले दो से तीन वर्षों में कंपनी के प्रमुख ईएसजी संकेतकों में हुए सुधार का आकलन किया जाता है।
प्रश्न 4. खुदरा निवेशकों (Retail Investors) के लिए आपका क्या व्यावहारिक सुझाव है? किसी कंपनी का मूल्यांकन करते समय उन्हें ईएसजी (ESG) और सतत विकास (Sustainability) से जुड़े किन पहलुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए?
सैकत रॉय:
खुदरा निवेशकों को निवेश का निर्णय लेते समय ईएसजी (ESG) को जोखिम और गुणवत्ता का एक अतिरिक्त मूल्यांकन मानदंड मानना चाहिए। यह पारंपरिक वित्तीय विश्लेषण, कंपनी के मूलभूत आधार (Business Fundamentals) और मूल्यांकन (Valuation) का विकल्प नहीं है, बल्कि उसके साथ मिलकर किसी कंपनी की दीर्घकालिक स्थिरता, विश्वसनीयता और जोखिमों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता करता है।
मेरे अनुसार खुदरा निवेशकों को विशेष रूप से पाँच महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना चाहिए।
पहला—प्रकटीकरण (Disclosure) की गुणवत्ता।
किसी कंपनी द्वारा किए गए ईएसजी दावों के पीछे स्पष्ट, मापनीय और तुलनात्मक जानकारी होनी चाहिए। केयर ईएसजी (CARE ESG) अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया में वार्षिक रिपोर्ट, सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट, बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट (BRSR), सार्वजनिक प्रकटीकरण तथा कंपनी द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचनाओं का अध्ययन करता है।
दूसरा—कॉर्पोरेट गवर्नेंस की गुणवत्ता।
निवेशकों को यह देखना चाहिए कि कंपनी का निदेशक मंडल कितना प्रभावी है, व्यावसायिक नैतिकता का स्तर कैसा है, संबंधित पक्षों (Related Parties) के साथ लेन-देन कितने पारदर्शी हैं, शिकायत निवारण व्यवस्था कितनी प्रभावी है, जोखिम प्रबंधन की प्रणाली कैसी है और रिपोर्टिंग कितनी अनुशासित एवं विश्वसनीय है।
तीसरा—उद्योग-विशिष्ट (Sector-Specific) महत्वपूर्ण पहलुओं को समझना।
हर उद्योग की प्राथमिकताएँ अलग होती हैं। उदाहरण के लिए, विनिर्माण क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन, ऊर्जा, जल, अपशिष्ट प्रबंधन और जैव विविधता महत्वपूर्ण हैं, जबकि वित्तीय और सेवा क्षेत्रों में उपभोक्ता संरक्षण, डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, सेवा गुणवत्ता, जिम्मेदार आपूर्ति श्रृंखला और सुशासन अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
चौथा—नीतियों से अधिक वास्तविक परिणामों को देखना।
केवल अच्छी नीतियाँ या घोषणाएँ पर्याप्त नहीं हैं। केयर ईएसजी अपनी मूल्यांकन पद्धति में केवल अनुपालन या नीति दस्तावेजों की तुलना में वास्तविक प्रदर्शन (Performance Indicators) को अधिक महत्व देता है, क्योंकि किसी कंपनी की वास्तविक जिम्मेदारी उसके कार्यों और परिणामों से दिखाई देती है।
पाँचवाँ—विवादों (Controversies) और सुधारात्मक कदमों पर ध्यान देना।
यदि किसी कंपनी से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण पर्यावरणीय, सामाजिक या गवर्नेंस संबंधी विवाद सामने आया है, तो यह भी देखना आवश्यक है कि कंपनी ने उसे कितनी गंभीरता से लिया और सुधार के लिए क्या कदम उठाए। केयर ईएसजी अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया में ऐसे मामलों की गंभीरता, प्रभाव और समाधान की स्थिति का भी आकलन करता है।
अंत में मैं निवेशकों से केवल इतना कहना चाहूँगा कि किसी कंपनी के आकर्षक दावों या विज्ञापनों के आधार पर निर्णय न लें। हमेशा तथ्यों, वास्तविक प्रदर्शन, स्पष्ट लक्ष्यों, पारदर्शी प्रकटीकरण और स्वतंत्र ईएसजी मूल्यांकन के आधार पर ही निवेश का निर्णय करें।
प्रश्न 5. भारत में जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण (Responsible Business Practices) का भविष्य आप किस रूप में देखते हैं? इसे मजबूत बनाने के लिए नियामकों, कंपनियों, निवेशकों और उपभोक्ता संगठनों को मिलकर क्या कदम उठाने चाहिए?
सैकत रॉय:
भारत में जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण अब केवल स्वैच्छिक (Voluntary) पहल नहीं रह गया है, बल्कि यह कंपनियों की दीर्घकालिक सफलता और विश्वसनीयता के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता बनता जा रहा है।
बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट (BRSR) जैसे नियामकीय ढाँचों ने कंपनियों में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर प्रकटीकरण की संस्कृति को मजबूत किया है। केयर ईएसजी का भी मानना है कि भारत का ईएसजी नियामकीय ढाँचा लगातार विकसित हो रहा है, जिसका उद्देश्य निवेशकों और उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाना, ग्रीनवॉशिंग (Greenwashing) जैसी भ्रामक प्रवृत्तियों को रोकना तथा ईएसजी रेटिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है।
आगे बढ़ते हुए सभी हितधारकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
नियामकों (Regulators) को प्रकटीकरण की गुणवत्ता, एकरूपता, तुलनात्मकता और स्वतंत्र सत्यापन (Assurance) को और मजबूत करने के लिए प्रयास जारी रखने चाहिए।
कंपनियों को ईएसजी को केवल अनुपालन तक सीमित न रखकर अपनी व्यावसायिक रणनीति, कॉर्पोरेट गवर्नेंस, संचालन, जोखिम प्रबंधन और पूंजी आवंटन का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।
निवेशकों को भी केवल वित्तीय प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि ईएसजी से जुड़े पहलुओं के आधार पर कंपनियों की दीर्घकालिक स्थिरता का मूल्यांकन करना चाहिए और महत्वपूर्ण ईएसजी विषयों पर कंपनियों के साथ सकारात्मक संवाद बनाए रखना चाहिए।
उपभोक्ता संगठनों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्हें ईएसजी के प्रति जागरूकता बढ़ानी चाहिए और आम उपभोक्ताओं को यह समझाने का प्रयास करना चाहिए कि जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण का सीधा प्रभाव उत्पादों की गुणवत्ता, ग्राहक सेवा, पारदर्शिता, शिकायत निवारण व्यवस्था और उपभोक्ता विश्वास पर पड़ता है।
आज जिम्मेदार व्यवसाय का मूल्यांकन केवल पर्यावरणीय प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इसमें सामाजिक प्रभाव, उपभोक्ता हितों की सुरक्षा, शिकायत निवारण व्यवस्था, कार्यस्थल की सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, निदेशक मंडल की निगरानी, व्यावसायिक नैतिकता तथा प्रकटीकरण की गुणवत्ता जैसे अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं का समग्र मूल्यांकन किया जाता है।
मेरा मानना है कि भारत में जिम्मेदार व्यवसाय का भविष्य विश्वसनीय आँकड़ों, उद्योग-विशिष्ट मूल्यांकन, पारदर्शी रिपोर्टिंग, निरंतर सुधार (Measurable Transition) और स्वतंत्र मूल्यांकन प्रणाली पर आधारित होगा। यही तत्व भविष्य में उपभोक्ताओं, निवेशकों और समाज के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करेंगे।
